वैधव्य दोष / विधवा योगज्योतिष में “वैधव्य दोष” स्त्री की कुंडली में और “विधुर योग” पुरुष की कुंडली में देखा जाता है। इसका मतलब जीवनसाथी की आयु को खतरा या विवाह का टूटना होता है। मुख्य 8 स्थितियाँ जब वैधव्य दोष बनता है*
1। मंगली दोष का मैच न होना** लड़की मंगली हो, लड़का न हो। या लड़का मंगली, लड़की न हो। पति/पत्नी को कष्ट, अलगाव, दुर्घटना। 1,4,7,8,12 भाव में मंगल हो तो मंगली।
2 सप्तम भाव में पाप ग्रह युति** 7वें भाव में मंगल नीच का होकर + शनि/राहु/केतु के साथ बैठा हो। कर्क में मंगल नीच होता है। विवाह के बाद संघर्ष, साथी की सेहत खराब, आकस्मिक घटना का योग बनता है 3 लग्नेश पीड़ित** लग्नेश यानी पहले भाव का मालिक नीच राशि में हो + शनि, राहु, केतु, मंगल जैसे पापी ग्रह के साथ हो। खुद जातक की आयु कमजोर, इसका असर जीवनसाथी पर भी आता है। 4 सप्तमेश 6,8,12 में** 7वें भाव का स्वामी छठे, आठवें या बारहवें भाव में चला जाए और पाप ग्रह से दृष्ट हो। वैवाहिक सुख नष्ट, साथी से वियोग, अस्पताल/कोर्ट केस। 5 अष्टम भाव पीड़ित** 8वें भाव में मंगल+शनि, मंगल+राहु, सूर्य+राहु हो। अष्टमेश नीच/अस्त हो। साथी की अकाल मृत्यु, अचानक दुर्घटना का डर बना रहता है 6 शुक्र/गुरु पीड़ित** स्त्री की कुंडली में गुरु पति का कारक। पुरुष की कुंडली में शुक्र पत्नी का कारक। ये नीच, अस्त, या राहु-केतु-शनि से पीड़ित हों। जीवनसाथी का सुख नहीं मिलता, बीमारी या वियोग।7 पाप कर्तरी योग** 7वें भाव के दोनों तरफ 6ठे और 8वें भाव में शनि, मंगल, राहु, केतु बैठे हों। शादी टूटते-टूटते बचना, शादी के बाद लगातार संकट बना रहता है।8 नवांश में दोष** लग्न कुंडली में भले ठीक हो पर D9 नवांश चार्ट में 7वां भाव, 7वां स्वामी या शुक्र/गुरु पाप ग्रह से पीड़ित हों। शादी के बाद संबंध टिकते नहीं, तलाक या वैधव्य जैसे समस्या आती हैं। आधुनिक युग में वैधव्य दोष का मतलब*
1. तलाक/अलगाव: कानूनी रूप से अलग होना।
2. लंबी बीमारी: साथी का सालों अस्पताल में रहना।
3. लंबी दूरी: नौकरी/जेल/विवाद के कारण सालों तक साथ न रह पाना।
4. अकाल मृत्यु: दुर्घटना, सर्जरी फेल होना – ये सबसे कम केस में होता है। डरने की जरूरत नहीं है किसी अच्छे काशी के ज्योतिषी से परामर्श ले कर शांति करे महामृत्युजंय सवालाख और ग्रहों की शांति उत्तम रहेगा गुरु की दृष्टि लग्न और सप्तम पे हो तो दोष कम हो जाता हैं शनि स्वराशि/उच्च*: शनि तुला, मकर, कुंभ में हो तो आयु बढ़ाता है और वैधव्य दोष को कमजोर करता है।मुख्य उपाय – योग्य ज्योतिषी से कुंडली दिखाकर ही करें।
1. कुंभ विवाह/अर्क विवाह: मंगली कन्या का विवाह पहले पीपल/भगवान विष्णु से कराया जाता है।
2. महामृत्युंजय जाप: सवा लाख जाप आयु रक्षा के लिए।
3. मंगल-चंडिका स्तोत्र: मंगल दोष के लिए मंगलवार को पाठ।
4. कात्यायनी मंत्र: “कात्यायनी महामाये…” का जाप कन्याओं के शीघ्र विवाह और दोष शांति के लिए करे
