विवाह में विलम्ब और तलाक का

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विवाह में विलम्ब और तलाक का कारण
1. मंगली दोष: कन्या या वर मंगली हो तो विवाह देर से या बाधा युक्त होता है।
2. सप्तमेश कमजोर: 7वें भाव का स्वामी अंश बल में कमजोर, नीच, अस्त, या पाप ग्रह शनि-राहु-केतु-मंगल के साथ हो।
3. सप्तमेश 6,8,12 भाव में: सप्तमेश छठे, आठवें या बारहवें भाव में चला जाए तो विवाह सुख में कमी/देरी, होती है
4. कालसर्प दोष: राहु-केतु के बीच सभी ग्रह आ जाएं तो 30-35 साल तक विवाह रुकता है।*अन्य मुख्यकारण भी होता1. शनि का प्रभाव** शनि सप्तम भाव में, सप्तमेश के साथ, या सप्तम पर दृष्टि डाले। शनि देरी का कारक है। 30 के बाद विवाह कराता है।
2. गुरु कमजोर/पीड़ित** गुरु स्त्री की कुंडली में पति का कारक है। नीच, अस्त, राहु-केतु से पीड़ित हो या 6,8,12 में हो तो रिश्ते देर से बनते हैं।
3. शुक्र कमजोर/पीड़ित** शुक्र विवाह और भोग का कारक है। पुरुष की कुंडली में नीच कन्या राशि में, अस्त, या पाप ग्रह से पीड़ित हो तो विवाह सुख देर से।
4. नवांश कुंडली में दोष** लग्न कुंडली ठीक हो पर D9 चार्ट में सप्तम भाव या सप्तमेश पीड़ित हो तो विवाह टूटता है या देर से होता है।
5. मांगलिक के अलावा दोष** *पितृ दोष: 9वें भाव में राहु/केतु/शनि। **नाड़ी दोष: वर-वधू की नाड़ी एक हो। **भकूट दोष*: 6-8 का मिलान हो। इनसे भी विवाह टूटते हैं।
6. सप्तम भाव पर पाप कर्तरी** सप्तम भाव के दोनों तरफ यानी 6ठे और 8वें में पाप ग्रह बैठे हों। शादी की बात बनते-बनते बिगड़ जाती है।
7. ग्रहण दोष** सूर्य या चंद्र के साथ राहु-केतु सप्तम में हों। बदनामी, धोखा, रिश्ता टूटने का डर।
8. दशा का प्रभाव** 6, 8, 12 भाव के स्वामी की या शनि, राहु, केतु की महादशा चल रही हो तो उस दौरान विवाह नहीं होता।*
9. सप्तम में वक्री ग्रह* सप्तम में कोई वक्री ग्रह बैठा हो तो निर्णय लेने में देरी, रिश्ते बार-बार टूटना।*
10. विष योग* शनि-चंद्र की युति कुंडली में कहीं भी हो तो मानसिक तनाव से इंसान खुद शादी टालता रहता है।सबसे जरूरी बात:
1. एक-दो दोष से शादी रुकती नहीं। 3-4 बड़े दोष एक साथ हों तब दिक्कत आती है।
2. उपाय कुंडली मिलान के बाद ही करें। मंगली दोष का कुंभ विवाह, कालसर्प की पूजा, गुरु-शुक्र के मंत्र जाप, कात्यायनी मंत्र महामृत्युजंय जाप उत्तम रहेगा

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